‘बदनाम करने की इजाजत नहीं दे सकते’ : CJI
NCERT की किताब में न्यायपालिका पर सामग्री से सीजेआई नाराज

सत्य खबर हरियाणा
Supreme Court : सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने NCERT की क्लास 8 की नई किताब में ‘न्यायपालिका में भ्रष्टाचार’ का चैप्टर शामिल किए जाने पर नाराजगी जताई है। CJI ने कहा- किसी को भी न्यायपालिका को बदनाम करने की इजाजत नहीं दी जाएगी। कानून अपना काम करेगा। कोर्ट इस मामले पर खुद एक्शन लेने के लिए विचार कर रहा है। बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में CJI सूर्यकांत, जस्टिस विपुल एम पंचोली और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच में यह मामला कपिल सिब्बल ने उठाया था।
दरअसल, नेशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग (NCERT) ने 8वीं क्लास की नई सोशल साइंस टेक्स्टबुक में ज्यूडिशियरी में करप्शन पर एक सेक्शन शुरू किया है। इस चैप्टर में सुप्रीम कोर्ट के 81 हजार, हाईकोर्ट्स के 62 लाख 40, डिस्ट्रिक्ट और सबऑर्डिनेट कोर्ट के 4 करोड़ 70 लाख पेंडिंग केस की संख्या भी बताई गई है।
मामला उस पाठ से जुड़ा है जिसमें न्यायपालिका में भ्रष्टाचार से संबंधित एक हिस्सा जोड़ा गया है। वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल और अभिषेक मनु सिंघवी ने इस मुद्दे को अदालत के सामने उठाया। उन्होंने कहा कि स्कूल के बच्चों को इस तरह की सामग्री पढ़ाया जाना चिंताजनक है। इस पर सीजेआई ने कहा कि उन्हें इस विषय पर कई फोन और संदेश मिले हैं और वह पूरी तरह से मामले से अवगत हैं।
सीजेआई ने क्यों जताई नाराजगी
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि उन्हें इस बात की जानकारी है। उन्हें लगातार इस बारे में फोन कॉल, मैसेज मिल रहे हैं। बार और बेंच दोनों इससे व्यथित है। नाराजगी जाहिर करते हुए सीजेआई ने कहा कि संस्था का प्रमुख होने के नाते मैंने हमेशा अपने दायित्व को निभाया है। मैं किसी को इस बात की इजाजत नहीं दूंगा कि वो न्यायपालिका को बदनाम करें। किसी कीमत पर मैं इसकी इजाजत नहीं दूंगा, कोई कितना भी बड़ा क्यों न हो। कानून अपना काम करेगा। मैं जानता हूं कि इससे कैसे निपटा जाए। मैं स्वत: संज्ञान ले रहा हूं।
मुख्य न्यायाधीश ने कहा यह सोची समझी चाल प्रतीत होती है। इससे ज्यादा मैं कुछ नहीं कहूंगा। सीजेआई के रूप में मैं अपनी ड्यूटी निभा रहा हूं। इस मामले पर बेंच के दूसरे सदस्य जस्टिस बागची ने कहा कि यह पाठ संविधान के बुनियादी ढांचे के खिलाफ है। दरअसल, राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) की नई रिलीज हुई क्लास आठ की सोशल साइंस किताब में हमारे समाज में न्यायपालिका की भूमिका वाला शीर्षक अध्याय के तहत ज्यूडिशियरी में करप्शन पर एक सेक्शन शुरू किया गया है।
वरिष्ठ वकीलों ने उठाया मुद्दा
कपिल सिब्बल ने अदालत से स्वतः संज्ञान लेने की अपील की। अभिषेक मनु सिंघवी ने भी कहा कि ऐसी सामग्री छात्रों के मन में न्यायपालिका को लेकर गलत संदेश दे सकती है। सीजेआई ने दोनों वरिष्ठ वकीलों का धन्यवाद किया कि उन्होंने इस विषय को अदालत के संज्ञान में लाया।
क्या है विवाद का मूल कारण
एनसीईआरटी की कक्षा आठ की सामाजिक विज्ञान की पुस्तक के एक अध्याय में न्यायपालिका में भ्रष्टाचार शीर्षक से सामग्री जोड़ी गई है। इसी हिस्से को लेकर विवाद खड़ा हुआ है। सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिया है कि इस मामले में स्वतः संज्ञान लिया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस मुद्दे को गंभीरता से लिया गया है। अदालत ने भरोसा दिलाया कि उचित और कानूनी कदम उठाए जाएंगे। सीजेआई ने कहा कि न्यायपालिका की गरिमा और विश्वसनीयता को बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है।
#CJI #Defamation #LegalMatters #JusticeSystem #CourtCase #LegalRights #FreedomOfSpeech #JudicialIndependence #RuleOfLaw #GovernmentAccountability #CivicsEducation #RightsAndResponsibilities #DefamationLaw #CorteSuprem #JudicialProcess #LegalAdvice #YourVoiceMatters #RightsProtection #JusticeForAll #CivicEngagement