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औद्योगिक विकास के लिए मुख्यमंत्री का बड़ा फैसला, किसान भी बन पाएंगे उद्योगपति

जमीन देने वाले किसानों को मिलेंगे तीन विकल्प, सोमवार को मिल सकती है कैबिनेट के मंजूरी

Satyakhabarindia

सत्य खबर हरियाणा

New Policy for IMT : प्रदेश में औद्योगिक विकास और 10 न्यू औद्योगिक टाउनशिप (आईएमटी) बनाने के लिए लैंड पूलिंग पॉलिसी में संशोधन पर सहमति बन गई है। नई नीति में किसानों को मुआवजे के तीन विकल्प मिलेंगे। पहला औद्योगिक विकास और नई आईएमटी बनाने के लिए किसानों को उनकी जमीन के बदले विकसित जमीन पर 50 हिस्सा फीसद मिलेगा।

दूसरा किसान बाजार दर के हिसाब से मुआवजा ले सकते हैं। तीसरा किसान किसी अन्य स्थान पर 1200 वर्ग मीटर प्लॉट दो तीन हिस्सों में या एकमुश्त बड़ा प्लॉट ले सकेंगे।

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संशोधित पॉलिसी को कैबिनेट की मिलेगी मंजूरी

इस संशोधित पॉलिसी को मंजूरी के लिए कैबिनेट की बैठक में रखा जाएगा। सरकार के सूत्रों के अनुसार सोमवार को होने वाली हरियाणा कैबिनेट की बैठक में इस प्रस्ताव को रखे जाने की संभावना है।

क्यों किया सरकार ने फैसला

ई-भूमि पोर्टल पर जमीन की अलग-अलग दर की मांग और जगह-जगह जमीन पर विवाद के चलते हरियाणा सरकार ने किसानों को भागीदार बनाने का फैसला लिया है। इसमें सरकार, उद्योग और किसान तीनों की जरूरतों के मद्देनजर बदलाव किया गया है ताकि आईएमटी या औद्योगिक विकास में अवरोध न आए।

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मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय बैठक में चर्चा के बाद यह फैसला लिया गया है। इस दौरान उद्योग मंत्री राव नरबीर सिंह, सीएम के मुख्य प्रधान सचिव राजेश खुल्लर और प्रधान सचिव अरूण गुप्ता मौजूद रहे।

नारायणगढ़ में 1.5 करोड़ रुपये प्रति एकड़ दाम तय

आईएमटी स्थापित करने की दिशा में नारायणगढ़ क्षेत्र के किसानों के प्रतिनिधिमंडल ने सीएम नायब सिंह सैनी से चंडीगढ़ स्थित आवास पर मुलाकात कर जमीन देने पर सहमति जताई थी। किसानों ने सरकार की ओर से तय दरों पर अपनी भूमि देने की बात कही है जिससे करीब 450 एकड़ भूमि उपलब्ध होगी। प्रदेश सरकार ने नारायणगढ़ में करीब 1.5 करोड़ रुपये प्रति एकड़ का दाम तय किया है।

यहां बनेंगे आईएमटी

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राज्य में 10 नए आईएमटी विकसित करने की योजना पर काम हो रहा है। इनमें सिरसा, पलवल, अंबाला, नारायणगढ़, जींद, हिसार, सोहना, नारनौल, रोहतक और रेवाड़ी शामिल हैं। इनमें जींद में सबसे बड़ा प्रोजेक्ट दिल्ली-कटरा एक्सप्रेसवे और 152 डी एक्सप्रेसवे के पास करीब 12 हजार एकड़ में प्रस्तावित है।
लेकिन जींद में किसान जमीन देने को तैयार नहीं हो रहे थे लेकिन माना जाता है कि सरकार की इस नई पॉलिसी के बाद किसान जमीन देने पर सहमत हो सकते हैं, जिससे जींद में सबसे बड़ा आईएमटी बनने का रास्ता साफ हो जाएगा। इससे नए केवल जींद बल्कि दूसरे जिलों के लोगों को भी फायदा होगा।

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