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गेहूं खरीद के लिए बनाए गए नये नियमों के खिलाफ कांग्रेस उतरेगी मैदान में

कांग्रेस विधायक मंडियों का करेंगे दौरा, किसने की समस्याओं को सुनेंगे

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Congress : प्रदेश कांग्रेस गेहूं की खरीद के लिए बनाए गए प्रदेश सरकार के नए नियमों के खिलाफ मैदान में उतरेगी। हरियाणा विधानसभा में प्रतिपक्ष के नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि बीजेपी की रीति-नीति बन गई है कि वो हर बार किसानों को परेशान करने का नया तरीका ढूंढ़ लाती है, इस बार भी उसने ऐसा किया है। इस बार गेहूं खरीद के लिए नया नियम बनाया गया है कि ट्रैक्टर की नंबर-प्लेट की फोटो समेत किसानों का बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन भी होगा। इतना ही नहीं, किसान को वैरिफाई करने के लिए 3-3 गारंटर भी चाहिए होंगे मानो ये अनाज मंडी नहीं, बल्कि कोई हाई सिक्योरिटी जोन या जेल हो।

पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि जल्द से जल्द और गेहूं की पूरी खरीद सुनिश्चित करने की बजाए, सरकार हमेशा खरीद में अड़ंगा लगाने की तरकीब निकालती रहती है। किसानों के लिए बायोमेट्रिक और गेट पर ही गेट पास काटने का नियम ऐसा है, जो प्रैक्टिकल रूप से लागू करना असंभव है, क्योंकि मेहनत के चलते बहुत से किसानों की अंगुलियों के निशान तक घिस जाते हैं। कई बार बैंकों तक में उनकी अंगुलियों के निशान मैच नहीं होते या फिर मैच करने में समय लगता है। ऐसे में अगर यही काम मंडी के गेट पर होगा तो ट्रैक्टरों की लंबी लाइन लग जाएगी, जो जाम का कारण बनेगी। ज्यादातर किसान किराए के ट्रैक्टर लेकर मंडी आते हैं। अगर जाम की वजह से या वैरिफिकेशन में देरी की वजह से खरीद में देरी हुई तो ट्रैक्टर का किराया कौन देगा? जाहिर तौर पर ये बोझ किसान पर पड़ेगा और पहले से कर्ज में डूबे किसान को और ज्यादा आर्थिक नुकसान होगा।

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भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने बताया कि कल हरियाणा कांग्रेस विधायक दल की बैठक में इस बात का फैसला हुआ है कि कांग्रेस विधायक मंडियों का दौरा करेंगे और वह किसानों की समस्याओं को सुनेंगे। उन्होंने कहा कि सरकार की बेवजह अड़चनों की पोल भी खुल चुकी है क्योंकि मंडियों में सरकारी खरीद पहले ही दिन ठप हो गई। कारण ये कि सरकार द्वारा लागू किए गए नए नियम और ई-खरीद पोर्टल दोनों फेल हो गए। मंडियों में किसान अपनी फसल लेकर पहुंचे, लेकिन ई-पोर्टल अपडेट न होने के कारण गेट पास तक जारी नहीं हो सके। नए नियमों के तहत किसानों को गेट पास के लिए बायोमेट्रिक सत्यापन, ट्रैक्टर नंबर और फसल की फोटो अपलोड करनी थी, लेकिन पहले ही दिन सिस्टम ठप हो गया। नतीजा ये रहा कि किसान मंडियों में घंटों इंतजार करते रहे, लेकिन उनकी फसल की खरीद नहीं हो सकी। आढ़ती एसोसिएशन ने भी बताया है कि एक गेट पास बनाने में 10 से 15 मिनट का समय लग रहा है, जिससे एक दिन में सीमित संख्या में ही किसानों की प्रक्रिया पूरी हो सकती है। इससे आने वाले दिनों में और बड़ी अव्यवस्था की आशंका है।

भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने मंडियों की व्यवस्था की ओर भी सरकार का ध्यान दिलाया। उन्होंने बताया कि वो लगातार किसानों से बात कर रहे हैं। मंडियों में आज ना बारदाना है, ना तिरपाल। ना लेबर, ना किसानों के लिये कोई सहूलियत और ना ही अब तक ट्रांसपोर्ट के टेंडर हुए हैं। ऐसे में जो फसल आएगी, वो मंडियों में ही पड़ी रहेगी और उसका उठान नहीं होगा और जब तक उठान नहीं होगा, तब तक किसानों की पेमेंट नहीं होगी। कुल मिलाकर ये सरकार ऐसे हालात पैदा कर रही है कि किसान मंडी आना ही छोड़ दें। मंडी क्या, ये सरकार तो चाहती है कि किसान खेती ही छोड़ और इस सेक्टर को भी पूरी तरह पूंजीपतियों के हाथों में सौंप दे।

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