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हरियाणा के इतिहास में पहली बार बंधुआ मजदूरी के शिकार किशोर को 10 लाख रुपए मुआवजा

बहादुरगढ़ में डेरी फार्म चलने वाले व्यक्ति ने किया था किशोर का शोषण

Satyakhabarindia

 

सत्य खबर हरियाणा

1st Time 10 Lac compensation : हरियाणा मानवाधिकार आयोग के हस्तक्षेप से बंधुआ मजदूरी, बाल शोषण और अमानवीय व्यवहार का शिकार हुए 15 वर्षीय बालक को 10 लाख का मुआवजा मिला है। आयोग की अनुशंसा पर हरियाणा सरकार ने 16 जून 2026 को विशेष मामले के रूप में यह राशि स्वीकृत की, जबकि हरियाणा विक्टिम कम्पेंसेशन स्कीम-2020 में ऐसे मामलों में अधिकतम 2 लाख मुआवजे का प्रावधान है।

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आयोग ने इस मामले में समाचार पत्र में प्रकाशित एक रिपोर्ट का स्वतः संज्ञान (सुओ मोटू) लिया था। रिपोर्ट में बिहार के किशनगंज जिले के निवासी इस नाबालिग बालक की दयनीय स्थिति का उल्लेख किया गया था। बालक अपने साथियों से बहादुरगढ़ रेलवे स्टेशन पर बिछड़ गया था और कथित रूप से एक व्यक्ति द्वारा रोजगार का झूठा लालच देकर अपने साथ ले जाया गया। वैध रोजगार उपलब्ध कराने के बजाय उसे एक डेयरी फार्म में दो माह से अधिक समय तक बंधक बनाकर कठोर श्रम करने के लिए मजबूर किया गया।

आयोग ने स्वतः संज्ञान लेते हुए इस मामले की जांच कराई। जांच में सामने आया कि बिहार के किशनगंज निवासी बालक को रोजगार का झांसा देकर बहादुरगढ़ के एक डेयरी फार्म में दो माह से अधिक समय तक बंधुआ मजदूरी कराई गई। उससे चारा काटने वाली मशीन सहित कई खतरनाक कार्य करवाए गए। इसी दौरान मशीन की चपेट में आने से उसका बायां हाथ कोहनी के नीचे से कट गया। आरोप है कि नियोक्ता ने उपचार कराने के बजाय घायल अवस्था में उसे सुनसान स्थान पर छोड़ दिया। इस घटना में पहले घटनास्थल जींद बताया गया था, लेकिन बाद में बताया गया कि यह घटना बहादुरगढ़ में हुई थी।

इस अवधि के दौरान बालक से चारा काटने वाली मशीन चलाने सहित अनेक खतरनाक कार्य कराए गए। एक दुखद दुर्घटना में चारा काटते समय उसका बायां हाथ कोहनी के नीचे से कट गया। आरोप है कि तत्काल चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने के बजाय नियोक्ता ने घायल बालक को एक सुनसान स्थान पर छोड़ दिया। गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद बालक किसी तरह पैदल नूंह पहुंचा, जहां एक सतर्क शिक्षक ने उसके बचाव, उपचार तथा पुलिस हस्तक्षेप की व्यवस्था सुनिश्चित की।

मामले की गंभीरता को देखते हुए आयोग ने पाया कि आरोपों से मानवाधिकारों के गंभीर उल्लंघन का मामला बनता है, जिसमें बाल शोषण, बंधुआ मजदूरी, मानवीय गरिमा से वंचित करना तथा भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 एवं 23 के तहत प्रदत्त मौलिक अधिकारों का हनन शामिल है। आयोग ने बाल अधिकारों पर संयुक्त राष्ट्र अभिसमय (United Nations Convention on the Rights of the Child) के तहत भारत की प्रतिबद्धताओं का भी उल्लेख किया तथा जिला प्रशासन, पुलिस विभाग, श्रम विभाग, चिकित्सा अधिकारियों एवं बाल संरक्षण एजेंसियों से विस्तृत रिपोर्ट तलब की।

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आयोग के निर्देशों के अनुपालन में व्यापक जांच की गई। पुलिस थाना जी.आर.पी., बहादुरगढ़ में दिनांक 10.08.2025 को एफआईआर संख्या 18 दर्ज की गई। जांच पूर्ण होने के उपरांत आरोपी के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता, 2023 तथा किशोर न्याय (बालकों की देखरेख एवं संरक्षण) अधिनियम, 2015 की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप-पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया गया। यह मामला वर्तमान में सक्षम न्यायालय के समक्ष विचाराधीन है।

14 मई को हुई सुनवाई के दौरान आयोग ने यह संज्ञान लिया कि पीड़ित बालक अपने बाएं हाथ के ऊपरी हिस्से को खोने के कारण स्थायी विकलांगता का शिकार हो गया है तथा उसे अत्यधिक शारीरिक और मानसिक पीड़ा का सामना करना पड़ा है। आयोग ने यह भी कहा कि बालक के पुनर्वास हेतु कृत्रिम अंग उपलब्ध कराना तथा दीर्घकालिक सहयोग सुनिश्चित करना आवश्यक होगा। चोट की गंभीरता, स्थायी विकलांगता तथा समग्र पुनर्वास की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए आयोग ने मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 की धारा 18 के अंतर्गत अपने अधिकारों का प्रयोग करते हुए पीड़ित को रुपए 10 लाख का मुआवजा प्रदान करने की अनुशंसा की।

आयोग की अनुशंसा पर कार्रवाई करते हुए हरियाणा सरकार ने 16 जून को पीड़ित बालक के पक्ष में रुपए 10 लाख की मुआवजा राशि स्वीकृत कर दी। उल्लेखनीय है कि हरियाणा विक्टिम कम्पेंसेशन स्कीम, 2020 के तहत ऐसे मामलों में अधिकतम ₹2 लाख तक का मुआवजा निर्धारित है, किन्तु राज्य सरकार ने इस मामले को विशेष श्रेणी में रखते हुए योजना के प्रावधानों में शिथिलता प्रदान की तथा मानवीय आधार पर रुपए 10 लाख की बढ़ी हुई सहायता राशि स्वीकृत की। हरियाणा का इतिहास में यह पहला मौका है जब इस प्रकार किसी पीड़ित को प्रदेश सरकार ने 10 लाख रुपए की मुआवजा राशि जारी की है

आयोग ने अपराध का पर्दाफाश करने तथा पीड़ित का पता लगाने में जांच अधिकारी द्वारा किए गए प्रयासों की भी सराहना की है। इस संबंध में पुलिस अधीक्षक सुश्री नितिका गहलौत, आईपीएस को प्रशंसा-पत्र जारी किया गया है, जबकि जांच अधिकारी इंस्पेक्टर सत्य प्रकाश को प्रशस्ति/पुरस्कार प्रदान करने का मामला सक्षम प्राधिकारी के विचाराधीन है।

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