दिल्ली-पानीपत-करनाल नमो भारत (RRTS) कॉरिडोर को हरियाणा सरकार की मंजूरी
33051 करोड रुपए होंगे खर्च हरियाणा सरकार करेगी 7472 करोड़ खर्च

सत्य खबर हरियाणा
Haryana Cabinet Meeting : हरियाणा कैबिनेट की आज हुई बैठक में 18 प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। 6:30 घंटे चली हरियाणा कैबिनेट की मैराथन बैठक में पूर्व मुख्यमंत्री तथा वर्तमान में हरियाणा विधानसभा में प्रतिपक्ष के नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा की कोठी के पैनल रेंट पर फैसला नहीं हो सका। सरकार ने अनेक प्रस्तावों को हरी झंडी देने का काम किया है।
भूपेंद्र सिंह हुड्डा को आवंटित सरकारी कोठी का करीब ₹16.49 लाख पेनल रेंट माफ करने के प्रस्ताव चर्चा होनी थी, लेकिन मंत्रिमंडल की बैठक में इस पर एक राय नहीं बन पाई।
मुख्यमंत्री नायब सैनी ने मंत्रिमंडल की बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत करते हुए एक सवाल के जवाब में बताया कि इस मुद्दे पर प्रस्ताव रखा गया था, लेकिन अब इस पर दोबारा सरकार समीक्षा करेगी। सीएम नायब सैनी ने बताया कि बैठक में करीब 31 एजेंडे रखे गए थे, जिनमें से 18 एजेंडों पर मुहर लगी है। बाकी प्रस्तावों पर सहमति नहीं हो पाई है।
राज्य में क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को मज़बूत करने और औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से हरियाणा ऑर्बिटल रेल कॉरिडोर (HORC) प्रोजेक्ट की संशोधित लागत अनुमान को मंजूरी दी गई है। पहले इस प्रोजेक्ट की मंजूर लागत 5618 करोड़ रुपए थी, जबकि अब संशोधित लागत लगभग 11709 करोड़ रुपए मंजूर की गई है।
आज की बैठक में रिठाला-नरेला-कुंडली (चरण-IV) कॉरिडोर के लिए रिवाइजड DPR को मंजूरी दी गई है। इस परियोजना में हरियाणा में 2.726 किलोमीटर लंबाई की नरेला से कुंडली तक मेट्रो लाइन का विस्तार शामिल है, जिसमें कुंडली और नाथूपुर में दो एलिवेटेड स्टेशन होंगे। हरियाणा के हिस्से को पूरा करने की कुल लागत 545.77 करोड़ रुपए अनुमोदित की गई है। भारत सरकार 97.30 करोड़ रुपए, जबकि हरियाणा सरकार 448.48 करोड़ रुपए का योगदान देगी, जिसमें भूमि की लागत भी शामिल है।
मंत्रिमंडल ने बैठक में दिल्ली-पानीपत-करनाल नमो भारत (RRTS) कॉरिडोर के कार्यान्वयन को मंज़ूरी प्रदान की गई है। यह परियोजना राज्य में तेज, सुरक्षित और आधुनिक सार्वजनिक परिवहन बुनियादी ढांचे को मज़बूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह कॉरिडोर दिल्ली से पानीपत तक और उससे आगे करनाल तक होगा, जिसकी कुल लंबाई लगभग 136.30 किलोमीटर होगी। परियोजना की अनुमानित कुल लागत लगभग 33,051.15 करोड़ रुपए है, जिसमें से हरियाणा सरकार का हिस्सा 7,472.11 करोड़ रुपए है। इस परियोजना में हरियाणा में 11 स्टेशन बनाए जाएंगे।
सुपीरियर ज्यूडिशियल सेवा नियम में संशोधन
हरियाणा सुपीरियर ज्यूडिशियल सेवा नियम में संशोधन को मंजूरी दी गई। इसके तहत कई बदलाव किए गए। पारदर्शिता और दक्षता को मजबूत करना इसका उद्देश्य है। इसके साथ ही स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के लिए फार्मेसी अधिकारियों की नियुक्ति में कुछ शर्तों को ढील दी गई है। अनिवार्य छह महीने की ट्रेनिंग की शर्त को हटाया गया है। कड़े मानदंडों से पद खाली रह रहे थे, इसलिए सेवा नियमों में ढील दी गई। फार्मेसी अधिकारी की सीधी भर्ती 95 प्रतिशत कर दी गई है। हरियाणा वित्तीय नियम में संशोधन किया गया है। इससे वित्तीय अनुशासन बढ़ेगा। ट्रेज़री के नियमों में भी संशोधन किया गया है। इसमें कुछ चीजें जोड़ी गई है। खाद्य एवं औषधि प्रशासन सेवा नियमों में संशोधन को मंजूरी दी गई है।
सरकारी कर्मचारियों की बल्ले-बल्ले
कर्मचारियों को दिए जाने वाले अग्रिम ऋण की व्यवस्था को पारदर्शी बनाने का फैसला लिया गया है। सरकारी कर्मचारी को मकान, वाहन, शादी और घर के लिए सरकार ऋण उपलब्ध करवाएगी। पहले पीएनबी से ऋण मिलता था। कक्षा एक में आयु मानदंड में बदलाव किया गया है। इसमें राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत अब आयु छह साल या इससे अधिक होनी चाहिए। अभी ये 5 वर्ष है। ग्रामीण क्षेत्र में पेयजल आपूर्ति के लिए फैसला लिया गया है। इसके तहत सामुदायिक भागीदारी को बढ़ावा दिया गया है। सेल्फ हेल्प ग्रुप पानी के बिलों को जमा करेंगे। दस फीसदी हिस्सा उन्हें मिलेगा।
औद्योगिक लाइसेंस नीति में संशोधन
मिक्स लैंड यूज को बेहतर करने के लिए भी फ़ैसलों को मंजूरी दी गई है। इसके तहत कई फैसले लिए गए हैं। औद्योगिक लाइसेंस नीति में संशोधन किया गया है जिसके तहत अब कई नियम बनाए गए हैं। ट्रांसपोर्ट और कम्युनिकेशन सेक्टरों के नियमों में भी संशोधन किए गए हैं। अफोर्डेबल हाउसिंग पॉलिसी में भी संशोधन किया गया है। 2013 की नीति में संशोधन किया गया है।
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