कॉकरोच जनता पार्टी के बाद आई ‘इश्क करो पार्टी’, पूर्व जज मार्कंडेय काटजू ने किया गठन, महुआ मोइत्रा को दिया न्योता

देश की राजनीति में एक और नए राजनीतिक संगठन की एंट्री हो गई है। कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के बाद अब सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश मार्कंडेय काटजू ने ‘इश्क करो पार्टी’ (आईकेपी) के गठन की घोषणा की है। उन्होंने दावा किया कि यह पार्टी देश की गरीबी, बेरोजगारी, कुपोषण और सामाजिक विभाजन जैसी गंभीर समस्याओं से निपटने के उद्देश्य से बनाई गई है।
मार्कंडेय काटजू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर पार्टी के गठन की जानकारी देते हुए कहा कि लोग इसे मजाक या केवल प्रेम-प्रसंगों को बढ़ावा देने वाली पार्टी समझ सकते हैं, लेकिन इसका वास्तविक उद्देश्य समाज में एकता और भाईचारे को मजबूत करना है। उनके अनुसार, भारत की अधिकांश समस्याओं का समाधान तभी संभव है जब लोग जाति, धर्म, नस्ल और अन्य भेदभावों से ऊपर उठकर एक-दूसरे के प्रति प्रेम और सम्मान का भाव रखें।
पूर्व न्यायाधीश ने कहा कि ‘इश्क’ का अर्थ केवल रोमांटिक प्रेम नहीं है, बल्कि समाज के सभी लोगों के प्रति अपनापन और संवेदनशीलता भी है। उन्होंने कहा कि जब तक देश के लोग एकजुट नहीं होंगे, तब तक गरीबी, बेरोजगारी और सामाजिक असमानता जैसी समस्याओं का समाधान संभव नहीं है।
काटजू ने अपनी नई पार्टी में शामिल होने के लिए तृणमूल कांग्रेस की सांसद Mahua Moitra को भी प्रस्ताव दिया है। हालांकि इस प्रस्ताव पर महुआ मोइत्रा की ओर से अभी तक कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
इस दौरान काटजू ने कॉकरोच जनता पार्टी और उसके संस्थापक अभिजीत दीपके की भी आलोचना की। उन्होंने कहा कि केवल केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग करने से शिक्षा व्यवस्था की समस्याएं खत्म नहीं होंगी। उनका तर्क था कि यदि एक मंत्री पद छोड़ भी देता है तो उसकी जगह दूसरा व्यक्ति आ जाएगा और मूल समस्याएं जस की तस बनी रहेंगी।
गौरतलब है कि हाल ही में कॉकरोच जनता पार्टी ने नीट परीक्षा में कथित गड़बड़ियों और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन किया था। इसी बीच मार्कंडेय काटजू द्वारा ‘इश्क करो पार्टी’ की घोषणा ने राजनीतिक और सोशल मीडिया जगत में नई बहस छेड़ दी है। अब देखना होगा कि यह नई पार्टी केवल चर्चा तक सीमित रहती है या आगे चलकर राजनीतिक रूप से सक्रिय भूमिका निभाती है।