नेशनल हेराल्ड केस में बड़ा मोड़ ED याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट की सुनवाई

नेशनल हेराल्ड से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में आज दिल्ली हाई कोर्ट में अहम सुनवाई होने जा रही है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने ट्रायल कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी है जिसमें उसकी चार्जशीट पर संज्ञान लेने से इनकार कर दिया गया था। यह मामला न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा की पीठ के समक्ष सूचीबद्ध है। इससे पहले अदालत ने कांग्रेस नेताओं सोनिया गांधी और राहुल गांधी समेत अन्य को नोटिस जारी किया था, जिससे मामला और भी गंभीर हो गया है।
क्या है पूरा मामला
ED का आरोप है कि यंग इंडियन कंपनी के माध्यम से एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (AJL) की करीब 2000 करोड़ रुपये की संपत्तियों पर कथित रूप से कब्जा किया गया। AJL वही कंपनी है जो नेशनल हेराल्ड अखबार प्रकाशित करती थी। जांच एजेंसी के अनुसार यंग इंडियन में गांधी परिवार की 76 प्रतिशत हिस्सेदारी थी और 90 करोड़ रुपये के कर्ज के बदले संपत्तियां कथित रूप से अनुचित तरीके से हासिल की गईं। इस मामले में कई अन्य लोगों को भी पक्षकार बनाया गया है।

ED और ट्रायल कोर्ट के बीच कानूनी टकराव
ED का कहना है कि यह पूरा मामला कानूनी व्याख्या का विषय है और ट्रायल कोर्ट का आदेश त्रुटिपूर्ण है। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत में दलील दी कि यह एक स्पष्ट कानूनी सवाल है और इसे तथ्यों के बजाय कानून के आधार पर देखा जाना चाहिए। वहीं ट्रायल कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि PMLA के तहत कार्रवाई तभी मान्य हो सकती है जब किसी शेड्यूल्ड अपराध के लिए FIR दर्ज हो। इसी आधार पर उसने चार्जशीट पर संज्ञान लेने से इनकार कर दिया था।
अब हाई कोर्ट के फैसले पर टिकी नजरें
ED का तर्क है कि निजी शिकायत पर दर्ज मामला भी उतना ही वैध है जितना पुलिस FIR पर आधारित मामला होता है। एजेंसी का कहना है कि ट्रायल कोर्ट का निर्णय भविष्य के कई मामलों को प्रभावित कर सकता है और जांच एजेंसियों के अधिकारों को सीमित कर सकता है। अब दिल्ली हाई कोर्ट का फैसला यह तय करेगा कि PMLA के तहत बिना FIR वाले मामलों में जांच और अभियोजन कितनी वैधता रखते हैं। इस फैसले पर पूरे देश की राजनीतिक और कानूनी नजरें टिकी हुई हैं।