IAS पंकज अग्रवाल के खुलने लगे चिट्ठे, 50 करोड़ का एक और घोटाला आया सामने
राज्यसभा चुनाव के बाद मिली थी महत्वपूर्ण नियुक्तियां

सत्य खबर हरियाणा
Haryana IDFC Bank Scam : 657 करोड़ रुपये के कथित बैंक घोटाले में सीबीआई द्वारा गिरफ्तार हरियाणा कैडर के 2000 बैच के आईएएस अधिकारी पंकज अग्रवाल की मुश्किलें और बढ़ गई हैं।अग्रवाल की गिरफ्तारी के साथ ही राज्यसभा चुनाव के दौरान उनकी भूमिका को लेकर उठा विवाद भी फिर चर्चा में आ गया है। साथ ही शिक्षा विभाग में प्रधान सचिव रहते हुए अग्रवाल ने हरियाणा स्कूल शिक्षा परियोजना परिषद से 50 करोड़ रुपये से अधिक की राशि के कथित गबन में भूमिका निभाई। इसके अलावा कृषि एवं किसान कल्याण विभाग में कार्यकाल के दौरान हरियाणा राज्य कृषि विपणन बोर्ड से करीब 10 करोड़ रुपये के कथित गबन से भी उनका नाम जोड़ा गया है।

बुधवार को हरियाणा कांग्रेस के विधायक अशोक अरोड़ा ने आरोप लगाया कि आईएएस पंकज अग्रवाल पर राज्यसभा चुनाव भाजपा के पक्ष में निकलवाने का दबाव था। आफताब अहमद के साथ पत्रकारवार्ता में अरोड़ा ने आरोप लगाया कि राज्यसभा चुनाव जब हुआ तब भी हमने कहा था कि रिटर्निंग आफिसर पंकज अग्रवाल की भूमिका सही नहीं है। अब जिस तरीके से पंकज अग्रवाल भ्रष्टाचार के मामले में गिरफ्तार हुए हैं उससे यह बात सिद्ध होती है कि इस अधिकारी की नीयत ठीक नहीं थी। इस मामले में एफआईआर होने के बाद भी इस अधिकारी को राज्यसभा चुनाव का रिटर्निंग आफिसर लगाया गया। इससे सिद्ध होता है कि सरकार मिलीभगत कर चुनाव को प्रभावित करना चाहती थी।
इससे पहले राज्यसभा चुनाव के बाद कांग्रेस विधायक दल ने 19 मार्च को राज्यपाल को ज्ञापन सौंपकर अग्रवाल के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी। ज्ञापन में आरोप लगाया गया था कि रिटर्निंग अधिकारी ने कांग्रेस विधायकों के मतों को अनुचित तरीके से अमान्य घोषित किया, जबकि भाजपा और निर्दलीय उम्मीदवारों के पक्ष में पड़े कुछ मतों को स्वीकार किया गया। कांग्रेस के मुख्य सचेतक बीबी बत्रा ने पूछा था कि जब अग्रवाल पहले से जांच के दायरे में थे तो उन्हें रिटर्निंग अधिकारी क्यों बनाया गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया था कि चुनाव निष्पक्ष ढंग से नहीं कराया गया।
16 मार्च को हुए राज्यसभा चुनाव में पंकज अग्रवाल रिटर्निंग अधिकारी थे। चुनाव के दौरान कांग्रेस ने उन पर भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार के पक्ष में काम करने तथा कांग्रेस विधायकों के मतों को अमान्य ठहराने के आरोप लगाए थे। हालांकि चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार करमवीर सिंह बौद्ध विजयी रहे थे।
राज्यसभा चुनाव के तीन दिन बाद, 19 मार्च को अग्रवाल को सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग का प्रधान सचिव, हरियाणा सरस्वती हेरिटेज बोर्ड का सलाहकार तथा खान एवं भू-विज्ञान विभाग का प्रधान सचिव नियुक्त किया गया था। उस समय तक राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसवीएसीबी) इस कथित बैंक घोटाले की जांच शुरू कर चुका था और अग्रवाल जांच के दायरे में थे।
जांच एजेंसियों के अनुसार आईडीएफसी फर्स्ट बैंक और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक के कुछ अधिकारियों ने सरकारी अधिकारियों के साथ कथित मिलीभगत कर हरियाणा सरकार के आठ विभागों और चंडीगढ़ प्रशासन के दो विभागों के खातों से करोड़ों रुपये की राशि का गबन किया।
सीबीआई का आरोप है कि स्कूल शिक्षा विभाग में प्रधान सचिव रहते हुए अग्रवाल ने हरियाणा स्कूल शिक्षा परियोजना परिषद से 50 करोड़ रुपये से अधिक की राशि के कथित गबन में भूमिका निभाई। इसके अलावा कृषि एवं किसान कल्याण विभाग में कार्यकाल के दौरान हरियाणा राज्य कृषि विपणन बोर्ड से करीब 10 करोड़ रुपये के कथित गबन से भी उनका नाम जोड़ा गया है।
कांग्रेस लगातार उठाती रही सवाल
सीबीआई ने 8 अप्रैल को मामले की जांच अपने हाथ में ली थी। उसी दिन अग्रवाल सहित अन्य आरोपी अधिकारियों से कई महत्वपूर्ण विभाग वापस लेकर उन्हें वास्तुकला विभाग का प्रधान सचिव नियुक्त किया गया था। गिरफ्तारी तक वह इसी पद पर कार्यरत थे।
अग्रवाल की गिरफ्तारी के बाद रोहतक सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने भी इस मामले को राज्यसभा चुनाव विवाद से जोड़ते हुए भाजपा सरकार पर निशाना साधा। सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर उन्होंने कहा कि गिरफ्तारी से चुनाव के दौरान उठे सवालों को नया बल मिला है।
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