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Haryana Pollution: हवा जहरीली, प्रशासन सुस्त! CPCB रिपोर्ट बताती है कि 19% प्रदूषण शिकायतें अभी भी बिना निपटाई

Satyakhabarindia

Haryana Pollution: हरियाणा की हवा लगातार विषैली होती जा रही है, लेकिन सरकारी तंत्र अभी भी सुस्त दिखाई दे रहा है। कई शहरों में एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) लगातार 250 के ऊपर है, जबकि कुछ औद्योगिक इलाकों में यह 350 तक पहुँच गया है, जो कि “बहुत खराब” श्रेणी में आता है। ऐसे में सरकार के प्रदूषण नियंत्रण के दावों की हवा निकल रही है।

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) की दो रिपोर्ट, Redressal Status-1417 और Redressal Hotspot Status-1404, दर्शाती हैं कि शिकायतों की संख्या बढ़ी है, लेकिन कार्रवाई की गति आधी हो गई है। पिछले चार वर्षों (15 अक्टूबर 2021 से 20 अक्टूबर 2025) में राज्य में 2,873 वायु प्रदूषण शिकायतें दर्ज की गईं, जिनमें से केवल 2,332 मामले हल किए गए, यानी मात्र 81% मामलों का समाधान हुआ।

बड़े शहरों में बेहतर निगरानी, छोटे शहरों में कमी

रिपोर्ट के अनुसार, गुरुग्राम और फरीदाबाद जैसे बड़े शहरों में स्थानीय एजेंसियां सक्रिय रही, लेकिन राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (HPCB) का समाधान प्रतिशत केवल 46% था। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर यह सुस्ती जारी रही, तो छोटे शहर जल्द ही नए प्रदूषण हॉटस्पॉट बन सकते हैं।

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बड़े शहरों में GPS आधारित सफाई वाहन, मोबाइल मॉनिटरिंग यूनिट और डिजिटल रिपोर्टिंग सिस्टम की वजह से शिकायतों का निपटान तेज हुआ। उदाहरण के लिए, गुरुग्राम में शिकायतों का समाधान 93%, फरीदाबाद 86% और बल्लभगढ़ 91% रहा। इसके विपरीत, हिसार, रोहतक और बहादुरगढ़ में 50-60% जबकि करनाल, पानीपत और यमुनानगर में 40% से कम मामले ही निपटाए जा सके। विशेषज्ञों के अनुसार, छोटे जिलों में संसाधनों की कमी, प्रशिक्षित कर्मियों की कमी और मॉनिटरिंग उपकरणों की कमी मुख्य समस्या है।

Haryana Pollution: हवा जहरीली, प्रशासन सुस्त! CPCB रिपोर्ट बताती है कि 19% प्रदूषण शिकायतें अभी भी बिना निपटाई

छोटे शहर बने नए प्रदूषण हॉटस्पॉट

Redressal Hotspot Status – 1404 रिपोर्ट के अनुसार, हरियाणा के छोटे जिलों में पिछले दो वर्षों में प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ा है। हिसार, रोहतक, बहादुरगढ़, करनाल और यमुनानगर अब राज्य के नए प्रदूषण हॉटस्पॉट माने जा रहे हैं।

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इन क्षेत्रों में निर्माण कार्य, ईंट भट्टे, खुले में कचरा जलाना और बढ़ती ट्रैफिक मुख्य प्रदूषण स्रोत हैं। रिपोर्ट के अनुसार, इन जिलों से मिली शिकायतों का औसत समाधान दर 55% से कम रहा। स्थानीय वायु गुणवत्ता मॉनिटरिंग स्टेशन और मानव संसाधन की कमी कार्रवाई में सबसे बड़ी बाधा बन रही है।

राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड पर सवाल

दोनों रिपोर्ट में राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (HPCB) की कार्यप्रणाली सबसे कमजोर कड़ी के रूप में सामने आई। बोर्ड द्वारा प्राप्त शिकायतों में केवल 46% का समाधान हुआ। CPCB ने इस मामले पर गंभीर टिप्पणियां की हैं।

रिपोर्टों में कहा गया है कि स्टेट बोर्ड की कार्रवाई और फील्ड मॉनिटरिंग में गंभीर समन्वय की कमी है। पर्यावरण विशेषज्ञों का सुझाव है कि HPCB को जिलास्तरीय स्वतंत्र नियंत्रण इकाइयां और पारदर्शी रिपोर्टिंग सिस्टम लागू करना चाहिए। वर्तमान में, रिपोर्टिंग अधिकांश मामलों में केंद्रीकृत है, जिसके कारण कार्रवाई में देरी और जिम्मेदारी की कमी बनी रहती है।

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