युवती से गैंगरेप मामले में दो बड़े खुलासे जिस वाहन को सबसे सुरक्षित समझा गया, उसी में हुई वारदात आरोपियों ने पीड़िता को 600 रुपए दिए थे
युवती से गैंगरेप मामले में दो बड़े खुलासे जिस वाहन को सबसे सुरक्षित समझा गया, उसी में हुई वारदात आरोपियों ने पीड़िता को 600 रुपए दिए थे

Satya Khabar Panchkula
प्रदेश के फरीदाबाद में गैंगरेप की शिकार हुई लड़की के मामले में दो बड़े खुलासे हुए हैं। पुलिस ने स्वीकार किया है कि गैंगरेप की घटना किसी प्राइवेट वाहन में नहीं बल्कि एक प्राइवेट अस्पताल की एंबुलेंस में हुई। दूसरा यह कि आरोपियों ने पीड़िता को पेटीएम से ₹600 दिए थे।
फरीदाबाद में 25 वर्षीय युवती के साथ हुए गैंगरेप मामले में पुलिस जांच के दौरान एक अहम और चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। पुलिस के अनुसार यह जघन्य अपराध किसी वैन में नहीं, बल्कि एक निजी अस्पताल की एंबुलेंस में अंजाम दिया गया।
वरिष्ठ जांच अधिकारी ने रविवार को बताया कि दोनों आरोपी उसी निजी अस्पताल की एंबुलेंस में चालक और सहायक के रूप में कार्यरत थे। आरोपियों में एक उत्तर प्रदेश के मथुरा और दूसरा झांसी का निवासी है। दोनों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। घटना के छह दिन बाद भी पीड़िता अस्पताल में भर्ती है और उसका इलाज जारी है।
पुलिस के अनुसार, पीड़िता सोमवार शाम सेक्टर 23 स्थित अपनी मित्र के घर गई थी। वहां से लौटते समय वह ऑटो-रिक्शा से एनआईटी 2 चौक पहुंची और वहां से मेट्रो चौक तक पैदल आई। आधी रात के आसपास जब वह घर जाने के लिए ऑटो का इंतजार कर रही थी, तभी दोनों आरोपियों ने उसे लिफ्ट देने की पेशकश की।
आरोप है कि आरोपी उसे उसके घर छोड़ने के बजाय गुरुग्राम की ओर ले गए और चलती एंबुलेंस में उसके साथ दुष्कर्म किया। इसके बाद पूरी रात उसे अलग-अलग इलाकों में घुमाया गया और मंगलवार तड़के करीब तीन बजे उसे राजा चौक के पास सड़क पर फेंक दिया गया।
इस बीच पीड़िता का एक कथित वीडियो भी सामने आया है, जिसमें वह बताती है कि लिफ्ट देने के तुरंत बाद एक आरोपी ने उसके खाते में 600 रुपये ट्रांसफर किए और फिर उसका मोबाइल फोन छीन लिया। वीडियो में पीड़िता कहती है कि उस समय घना कोहरा था और मदद के लिए चीखने के बावजूद कोई सहायता नहीं मिली।
पुलिस ने बताया कि पीड़िता की हालत में सुधार होने के बाद मजिस्ट्रेट के समक्ष आरोपियों की पहचान परेड कराई जाएगी। इसके बाद आगे की पूछताछ के लिए जेल से प्रोडक्शन वारंट लिया जाएगा।
पीड़िता की बहन का कहना है कि उन्हें अब तक अपनी बहन से ढंग से मिलने तक नहीं दिया गया है। जब भी वह अस्पताल जाती हैं, तो या तो उन्हें बाहर ही रोक दिया जाता है या फिर बताया जाता है कि मरीज ठीक है, मिलने की जरूरत नहीं है। बहन का आरोप है कि जब वह मिलने की कोशिश करती हैं, तो पीड़िता को नींद का इंजेक्शन लगा दिया जाता है, जिससे कोई बातचीत नहीं हो पाती है। कमरे के चारों तरफ पर्दे लगा दिए जाते हैं और परिवार को बाहर ही खड़ा रखा जाता है।
बहन का कहना है कि ऐसे में उन्हें यह तक नहीं पता कि उनकी बहन की हालत वास्तव में कैसी है। परिवार का यह भी आरोप है कि इलाज के नाम पर लगातार पैसे मांगे जा रहे हैं। अब तक करीब 50 हजार रुपये जमा कराए जा चुके हैं और 28 हजार रुपए और मांग रहे हैं। परिवार पहले से ही मानसिक सदमे में है और ऊपर से आर्थिक दबाव ने हालात और मुश्किल बना दिए हैं।
पीड़िता का कहना है कि बारी-बारी से दोनों आरोपियों ने उनके साथ गैंग रेप किया। इस दौरान उन्होंने पहाड़ी के पास दो घंटे तक गाड़ी रोक कर रेप किया। पीड़िता ने बताया कि इस बीच कोई पुलिस की पेट्रोलिंग गाड़ी मदद के लिए नहीं मिली। क्यों पेट्रोलिंग नहीं हो रही थी? कैसे घने कोहरे का फायदा उठाते हुए गैंगरेप होता रहा और किसी को पता नहीं चला?