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भिवानी की 19 माह की सिया को इलाज के लिए 9 करोड़ की जरूरत

पिता करते हैं कैटरिंग का काम, कैसे होगा इतनी बड़ी रकम का जुगाड़

Satyakhabarindia

 

सत्य खबर हरियाणा

Siya suffering from SMA Type 1 : कुछ घटनाएं ऐसी होती हैं जिन्हें सुनकर रूह तक कांप जाती है। भिवानी के विद्या नगर की रहने वाली करीब 19 महीने की सिया की जिंदगी मुश्किल दौर से गुजर रही है। मुश्किल भी ऐसी कि जिसका इलाज संभव है लेकिन वह इतना महंगा है कि इस परिवार के वश से बाहर है। सिया के माता-पिता के लिए यह बड़ी अजीब व्यथा है कि वह न तो सिया का इलाज ही करवा पा रहे हैं और न ही उसे मरता हुआ देख सकते हैं।

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सिया की मां नीतू ने बताया कि जब सिया छह महीने की थी, तब उसे निमोनिया हुआ। कई अस्पतालों में इलाज कराने के बावजूद उसकी सेहत में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ। बाद में न्यूरोलॉजिस्ट की सलाह पर जेनेटिक जांच कराई गई, जिसमें सिया को स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी (SMA) टाइप-1 होने की पुष्टि हुई। ये एक दुर्लभ आनुवंशिक बीमारी है, जिसमें धीरे-धीरे शरीर की मांसपेशियां कमजोर होती जाती हैं।

बता दें कि स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी (SMA) लगभग 10,000 में से 1 व्यक्ति को होती है। लगभग हर 50 में से 1 सामान्य व्यक्ति इस बीमारी का वाहक हो सकता है, जिनमें लक्षण दिखाई नहीं देते, लेकिन जब माता-पिता दोनों वाहक हों, तब बच्चे में यह बीमारी होने का खतरा रहता है। स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी (SMA) टाइप-1 करीब 20000 लोगों में से एक व्यक्ति को होती है। टाइप-1 के लक्षण जन्म के पहले 6 महीनों के भीतर दिखने लगते हैं।

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सिया मां नीतू के मुताबिक सिया को पीजीआई और एम्स में भी दिखाया गया। वहां डॉक्टरों ने बताया कि उसके इलाज के लिए जोलजेंस्मा (Zolgensma) नाम का इंजेक्शन लगाया जा सकता है। इस इंजेक्शन की कीमत करीब 17 करोड़ रुपये है और टैक्स संबंधी छूट की प्रक्रिया पूरी करवाने के बाद भारत में इसका खर्च करीब 9 करोड़ रुपये पड़ सकता है। एक छोटी सी दुकान से गुजर-बसर करने वाले परिवार के लिए इतनी बड़ी राशि जुटाना संभव नहीं है।

नीतू ने बताया कि सिया ना ठीक से बैठ पाती है और ना ही अपने शरीर पर नियंत्रण रख पाती है। कई बार उसका ऑक्सीजन स्तर अचानक गिर जाता है, जिसके बाद उसे तुरंत अस्पताल ले जाना पड़ता है। बच्ची की हालत लगातार बिगड़ रही है और समय पर इलाज ही उसकी जिंदगी बचा सकता है। वह कहती हैं, हमें नहीं पता कि बच्ची के पास कितना टाइम है। हर दिन हमें आखिरी दिन लगता है।

सिया की मां ने लोगों से भावुक अपील करते हुए कहा कि एम्स की ओर से इलाज के लिए एक स्कैनर (QR कोड) भी जारी किया गया है। उनके अनुसार इस माध्यम से भेजी गई राशि सीधे अस्पताल में सिया के इलाज के लिए इस्तेमाल होगी। आजकल ऑनलाइन धोखाधड़ी के मामलों की वजह से लोग मदद करने से हिचकते हैं, लेकिन जो भी सहायता करेंगे, वो उनकी बेटी के इलाज के लिए ही उपयोग होगी। इस खाते में अब तक कितनी राशि जमा हुई है इसके बारे में सिया की मां को कोई जानकारी नहीं है।

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सिया के परिवार ने समाज के साथ-साथ सरकार से भी आर्थिक सहायता की अपील की है। उनका कहना है कि गंभीर और दुर्लभ बीमारियों से जूझ रहे परिवारों के लिए विशेष सहायता कोष होना चाहिए, ताकि आर्थिक तंगी के कारण किसी मासूम का इलाज न रुक जाए। परिवार को उम्मीद है कि लोगों के सहयोग और सरकारी मदद से सिया का इलाज संभव हो सकेगा। बता दें कि नीतू के पति कैटरिंग का काम करते हैं।

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