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केजरीवाल को फिर नोटिस, हाईकोर्ट में ईडी की याचिका ने बढ़ाई मुश्किलें

Satyakhabarindia

दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से जुड़े कथित आबकारी नीति मामले में एक बार फिर कानूनी हलचल तेज हो गई है। दिल्ली हाईकोर्ट ने इस मामले में नया नोटिस जारी करते हुए सुनवाई की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया है। यह नोटिस प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी की उस याचिका पर जारी किया गया है जिसमें एजेंसी ने ट्रायल कोर्ट द्वारा केजरीवाल को दी गई राहत को चुनौती दी है। अदालत के इस कदम से साफ हो गया है कि मामला अभी खत्म नहीं हुआ है बल्कि आने वाले दिनों में इसमें और अहम मोड़ देखने को मिल सकते हैं।

नोटिस नहीं पहुंचने पर कोर्ट की सख्त टिप्पणी

मामले की सुनवाई कर रहीं जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा ने साफ कहा कि पहले जारी किया गया नोटिस अरविंद केजरीवाल तक पहुंचा ही नहीं था। कोर्ट ने रिकॉर्ड का हवाला देते हुए बताया कि नोटिस की विधिवत सेवा नहीं हो पाई थी इसलिए नया नोटिस जारी करना जरूरी हो गया। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि अब इस मामले की अगली सुनवाई 22 जुलाई को होगी। इस टिप्पणी से यह संकेत मिलता है कि अदालत प्रक्रिया की पारदर्शिता और कानूनी औपचारिकताओं को बेहद गंभीरता से ले रही है।

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ईडी के आरोप, जांच से बचने की कोशिश का दावा

प्रवर्तन निदेशालय ने हाईकोर्ट में दलील दी कि केजरीवाल ने बार-बार समन मिलने के बावजूद जांच में शामिल होने से जानबूझकर इनकार किया। एजेंसी का कहना है कि उन्होंने जांच से बचने के लिए विभिन्न बहाने बनाए और सहयोग नहीं किया। ईडी के मुताबिक यह व्यवहार जांच प्रक्रिया में बाधा डालने वाला है और इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। एजेंसी ने यह भी कहा कि ट्रायल कोर्ट का फैसला तथ्यों को सही तरीके से नहीं परख पाया और इसमें गंभीर त्रुटियां हैं।

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ट्रायल कोर्ट का फैसला और आगे की कानूनी स्थिति

इससे पहले रॉउज एवेन्यू कोर्ट ने 22 जनवरी को अपने फैसले में कहा था कि ईडी यह साबित नहीं कर पाई कि समन सही तरीके से भेजे गए थे या केजरीवाल ने जानबूझकर उन्हें नजरअंदाज किया। कोर्ट ने ईमेल के जरिए समन भेजने की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए थे और इसे कानूनी तौर पर पर्याप्त नहीं माना था। फिलहाल इसी मामले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस में केजरीवाल अंतरिम जमानत पर हैं। वहीं सुप्रीम कोर्ट ने गिरफ्तारी के औचित्य से जुड़े मुद्दे को बड़ी बेंच के पास भेज रखा है। अब 22 जुलाई की अगली सुनवाई इस पूरे मामले की दिशा तय करने में अहम साबित हो सकती है।

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