NIT कुरुक्षेत्र में सभी छात्रों को 19 अप्रैल तक हॉस्टल खाली करने के आदेश
पिछले दो महीने में चार छात्रों ने सुसाइड किया, छात्रों ने बताया-उनको मेंटली टॉर्चर किया जा रहा

सत्य खबर हरियाणा
NIT Kurukshetra : नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी कुरुक्षेत्र में लगातार चौथी छात्रा द्वारा आत्महत्या के मामले के बाद प्रशासन ने तनावपूर्ण माहौल को देखते हुए बड़ा फैसला लिया है। सभी छात्रों अंडरग्रेजुएट, पोस्टग्रेजुएट और पीएचडी को अगले आदेश तक छुट्टियां घोषित कर दी गई हैं। संस्थान ने सभी छात्रों को 19 अप्रैल 2026 तक हॉस्टल खाली करने के निर्देश जारी कर दिए हैं। छात्रों के सुसाइड के बाद नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी सुर्खियों में आया हुआ है, क्योंकि पिछले दो महीने में यहां पर चार विद्यार्थियों ने सुसाइड कर लिया। छात्रों ने प्रोफेसर पर और प्रशासनिक अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। गुरुवार के दिन बीटेक द्वितीय वर्ष की छात्रा दीक्षा ने कैंपस में आत्महत्या कर ली थी। पुलिस ने मृतका दीक्षा दुबे की मौत की जांच शुरू कर दी है।

शुक्रवार को भी कैंपस में एक छात्रा ने पांचवें मंजिल से कूद कर आत्महत्या की कोशिश की। इस मामले में साथी छात्र-छात्राओं ने इस छात्रा को बचा लिया।
छात्रों ने बताया कि यहां पर अलग-अलग डिपार्टमेंट के कुछ प्रोफेसर और एकेडमिक लोग अलग-अलग चीजों के नाम पर उनको परेशान करते हैं। उनको मेंटली टॉर्चर किया जा रहा है। जिसके चलते ये मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। छात्रों ने बताया कि दीक्षा के प्रोफेसर महेश गुप्ता का बर्ताव काफी खराब था, जिसके चलते वो बच्चों पर काफी प्रेशर डाल रहा था। उसी के चलते दीक्षा ने आत्महत्या करने जैसा बड़ा कदम उठाया। उन्होंने कहा कि लड़कियों के पास फोन पर मैसेज करके उनको अलग से बुलाया जाता है और मानसिक तौर पर परेशान किया जा रहा है। अगर एकेडमिक लोगों को इसकी जानकारी दी जाती है तो वो भी उनको परेशान करते हैं।
छात्रों ने बेहतर काउंसलिंग, मानसिक स्वास्थ्य सुविधाओं तथा प्रशासनिक सुधारों की मांग की है। छात्रों का आरोप है कि संस्थान पहले कभी ऐसी लंबी प्रिपरेटरी छुट्टियां नहीं देता था। NIT प्रशासन ने इस कदम को शैक्षणिक तैयारी के रूप में बताया है, जबकि छात्र इसे तनाव और विरोध प्रदर्शनों को शांत करने की रणनीति मान रहे हैं। संस्थान में मानसिक स्वास्थ्य संकट को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की जा रही है। छात्रों ने बताया कि यहां पर अलग-अलग डिपार्टमेंट के कुछ प्रोफेसर और एकेडमिक लोग अलग-अलग चीजों के नाम पर उनको परेशान करते हैं। उनको मेंटली टॉर्चर किया जा रहा है। जिसके चलते ये मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। छात्रों ने बताया कि दीक्षा के प्रोफेसर महेश गुप्ता का बर्ताव काफी खराब था। जिसके चलते वो बच्चों पर काफी प्रेशर डाल रहा था। उसी के चलते दीक्षा ने आत्महत्या करने जैसा बड़ा कदम उठाया। उन्होंने कहा कि लड़कियों के पास फोन पर मैसेज करके उनको अलग से बुलाया जाता है और मानसिक तौर पर परेशान किया जा रहा है। अगर एकेडमिक लोगों को इसकी जानकारी दी जाती है तो वो भी उनको परेशान करते हैं।
इन बच्चों ने किया सुसाइड
पिछले दो महीने में चार छात्रों ने सुसाइड किया है। पहले 16 फरवरी को तेलंगाना के रहने वाले 19 वर्षीय अंगोद शिवा ने हॉस्टल के कमरे में जीवन लीला समाप्त की थी। दूसरा मामला 31 मार्च को सामने आया था। जहां हरियाणा के ही 22 वर्षीय पवन कुमार ने आत्महत्या की थी। पवन बीटेक इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग के सेकंड ईयर का विद्यार्थी था। तीसरा मामला 9 अप्रैल को सामने आया। जहां हरियाणा के सिरसा जिले के 22 वर्षीय प्रियांशु वर्मा ने आत्महत्या की थी। प्रियांशु बीटेक थर्ड ईयर में पढ़ाई कर रहा था। अब ताजा मामला 16 अप्रैल का है। जहां बिहार की रहने वाली दीक्षा ने अपने हॉस्टल के कमरे में आत्महत्या कर ली। दीक्षा बीटेक द्वितीय वर्ष की छात्रा थी।
पिछले दो महीने में सुसाइड के केस आने के बाद अब छात्रों का गुस्सा भी काफी ज्यादा है। हालांकि तीन मामले सामने आने के बाद तक भी छात्र शांत रहे, लेकिन अब वो इसकी जांच की मांग कर रहे हैं। जिसके चलते छात्र प्रोटेस्ट कर रहे हैं। यूनिवर्सिटी प्रशासन के आश्वासन के चलते छात्रों ने अपना प्रोटेस्ट खत्म किया। यूनिवर्सिटी प्रशासन ने कहा कि इन सभी मामलों को लेकर एक जांच कमेटी बनाई जाएगी। जो हर पहलू की गंभीरता से जांच करेगी और जो भी इसमें दोषी होगा। उसके खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
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