CBSE पेपर विवाद में केजरीवाल का हमला, सरकार पर गंभीर आरोप लगाए

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की 12वीं कक्षा की डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली को लेकर उठे विवाद के बाद केंद्र सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। मंगलवार को सरकार ने बोर्ड के दो शीर्ष अधिकारियों, चेयरमैन और सचिव को उनके पदों से हटा दिया। इसके साथ ही इस पूरे मामले की जांच के लिए एक उच्चस्तरीय समिति के गठन का भी आदेश जारी किया गया है। यह कार्रवाई ऑन-स्क्रीन मार्किंग प्रणाली में कथित अनियमितताओं के सामने आने के बाद की गई है।
डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली में अनियमितताओं के आरोप
मामला CBSE की 12वीं कक्षा में लागू की गई ऑन-स्क्रीन मार्किंग प्रणाली से जुड़ा है, जिसमें उत्तर पुस्तिकाओं का डिजिटल मूल्यांकन किया जाता है। आरोप है कि इस प्रणाली में कई तरह की गंभीर खामियां और अनियमितताएं सामने आईं, जिनसे छात्रों के परिणाम प्रभावित होने की आशंका जताई गई। इसी विवाद के बाद सरकार ने तत्काल कार्रवाई करते हुए जिम्मेदार अधिकारियों को हटाने का निर्णय लिया और पूरे सिस्टम की जांच का आदेश दिया। इस कदम को शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

केजरीवाल का हमला, सरकार पर लगाए गंभीर आरोप
इस पूरे मामले पर आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने केंद्र सरकार पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि केवल चेयरमैन और सचिव को हटाना इस बड़े कथित घोटाले का समाधान नहीं है। केजरीवाल ने आरोप लगाया कि यह कदम केवल औपचारिकता है और इससे लाखों छात्रों और अभिभावकों की चिंताओं का समाधान नहीं होता। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या इतनी बड़ी अनियमितताओं के बावजूद शिक्षा मंत्री को जिम्मेदार नहीं ठहराया जाएगा।
नई नियुक्तियां और प्रशासनिक बदलाव
सरकार की ओर से जारी आदेश के अनुसार वरिष्ठ नौकरशाह लोखंडे प्रशांत सीताराम को CBSE का नया चेयरमैन और वरुण भारद्वाज को नया सचिव नियुक्त किया गया है। इन नियुक्तियों के साथ ही पुराने अधिकारियों को उनके पदों से हटा दिया गया है। यह बदलाव ऐसे समय में हुआ है जब पूरे देश में CBSE की मूल्यांकन प्रक्रिया को लेकर सवाल उठ रहे हैं। प्रशासन का कहना है कि नई टीम पारदर्शिता और सुधार की दिशा में काम करेगी।
शिक्षा प्रणाली पर उठे बड़े सवाल
इस विवाद ने देश की परीक्षा और मूल्यांकन प्रणाली की विश्वसनीयता पर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं। डिजिटल मूल्यांकन जैसी आधुनिक तकनीक के उपयोग के बावजूद अनियमितताओं के आरोपों ने छात्रों और अभिभावकों में चिंता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस मामले की निष्पक्ष जांच जरूरी है ताकि भविष्य में ऐसी समस्याओं से बचा जा सके और शिक्षा प्रणाली पर भरोसा कायम रखा जा सके।