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कश्मीर साजिश मामले में NIA कोर्ट का बड़ा फैसला, तीन महिला ऑपरेटिव्स को कड़ी सजा

Satyakhabarindia

दिल्ली की NIA विशेष अदालत ने कश्मीर से जुड़े 2018 के बड़े साजिश मामले में अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने प्रतिबंधित संगठन दुख्तरान-ए-मिल्लत की तीन महिला ऑपरेटिव्स को दोषी मानते हुए कड़ी सजा दी है। संगठन की प्रमुख आसिया अंद्राबी को उम्रकैद की सजा सुनाई गई है। वहीं उसकी सहयोगी सोफी फहीमीदा और नाहिदा नसीरीन को 30-30 साल की सख्त कैद के साथ जुर्माना भी लगाया गया है। अदालत ने अपने फैसले में साफ कहा कि इन आरोपियों ने देश की एकता और संप्रभुता को नुकसान पहुंचाने की साजिश रची थी।

2018 से चल रहा था मामला, 2026 में आया फैसला

यह मामला साल 2018 का है जब NIA ने खुद संज्ञान लेते हुए केस दर्ज किया था। जांच के दौरान यह सामने आया कि तीनों आरोपी कश्मीर को भारत से अलग करने की साजिश में सक्रिय रूप से शामिल थीं। ये संगठन के जरिए अलगाववादी गतिविधियों को बढ़ावा दे रही थीं। अदालत ने जनवरी 2026 में ही तीनों को UAPA और IPC की कई गंभीर धाराओं में दोषी ठहरा दिया था। अब सजा सुनाते हुए कोर्ट ने इस मामले को राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा गंभीर अपराध माना और सख्त रुख अपनाया।

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जांच में सामने आए चौंकाने वाले तथ्य

NIA की जांच में कई अहम खुलासे हुए। जांच एजेंसी के मुताबिक आरोपी सोशल मीडिया, वीडियो और इंटरव्यू के जरिए लोगों को भड़काने का काम कर रहे थे। वे कश्मीर में नफरत फैलाने और हिंसा के लिए उकसाने की गतिविधियों में शामिल थीं। खास तौर पर जिहाद और अलगाववाद को बढ़ावा देने के लिए अभियान चलाया जा रहा था। आसिया अंद्राबी के खिलाफ पहले से ही 30 से अधिक मामले दर्ज हैं। वह आतंकी संगठन से जुड़े आशिक हुसैन फक्तू की पत्नी है जो पहले से उम्रकैद की सजा काट रहा है। वहीं सोफी फहीमीदा और नाहिदा नसीरीन पर भी कई अन्य गंभीर मामले दर्ज हैं।

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चार्जशीट और सबूतों ने मजबूत किया केस

NIA ने नवंबर 2018 में तीनों आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। इसमें सोशल मीडिया चैट, वीडियो और अन्य डिजिटल सबूतों को आधार बनाकर मजबूत केस तैयार किया गया था। जांच एजेंसी के अनुसार इनकी गतिविधियां सीधे तौर पर देश की सुरक्षा के लिए खतरा थीं। अदालत ने भी सबूतों को गंभीरता से लेते हुए सख्त सजा सुनाई। इस फैसले को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से एक बड़ा संदेश माना जा रहा है कि देश विरोधी गतिविधियों में शामिल लोगों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।

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