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सिविल सेवा दिवस से पहले PM का बड़ा संदेश, बदल जाएगी सरकारी कार्यशैली

Satyakhabarindia

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देशभर के एक करोड़ से अधिक लोक सेवकों को संबोधित करते हुए एक महत्वपूर्ण संदेश दिया है। उन्होंने अपनी चिट्ठी में साफ कहा कि ‘नागरिक देवो भव’ का सिद्धांत हर सरकारी निर्णय का आधार होना चाहिए। प्रधानमंत्री ने यह भी रेखांकित किया कि शासन का उद्देश्य केवल प्रशासन चलाना नहीं बल्कि संवेदनशीलता और करुणा के साथ जनता की सेवा करना है। उनके इस संदेश को प्रशासनिक व्यवस्था में बदलाव की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। उन्होंने लोक सेवकों से अपेक्षा की कि वे अपने कार्य को केवल जिम्मेदारी नहीं बल्कि सेवा का अवसर समझें और हर निर्णय में नागरिकों की भलाई को प्राथमिकता दें।

12 भाषाओं में संदेश, हर कोने तक पहुंचाने की कोशिश

प्रधानमंत्री द्वारा लिखा गया यह पत्र 12 अलग-अलग भारतीय भाषाओं में जारी किया गया है, ताकि देश के हर हिस्से के लोक सेवक इस संदेश को समझ सकें। इन भाषाओं में हिंदी, अंग्रेजी, मराठी, गुजराती, तमिल, तेलुगु, कन्नड़ और अन्य प्रमुख भाषाएं शामिल हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि 21वीं सदी बदलाव और अवसरों का दौर है, जहां तकनीक और नवाचार तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। ऐसे समय में प्रशासनिक तंत्र को भी खुद को बदलना होगा और नई चुनौतियों के लिए तैयार रहना होगा। उन्होंने यह भी कहा कि दुनिया की नजर भारत पर है और देश से उम्मीदें लगातार बढ़ रही हैं, ऐसे में लोक सेवकों की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है।

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सीखने की आदत और कर्मयोगी बनने पर जोर

प्रधानमंत्री ने अपने पत्र में ‘कर्मयोगी’ शब्द का इस्तेमाल करते हुए लोक सेवकों को प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि एक सच्चा लोक सेवक वही है जो लगातार सीखता रहता है और खुद को बेहतर बनाता है। ‘आईगॉट कर्मयोगी’ जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि सीखना एक आजीवन प्रक्रिया होनी चाहिए। इससे न केवल व्यक्ति का विकास होता है बल्कि पूरे देश की कार्य संस्कृति में सुधार आता है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रशासन में काम करने वाले लोगों को उदाहरण बनना चाहिए ताकि समाज के बाकी लोग भी उनसे प्रेरणा ले सकें। यह संदेश साफ करता है कि सरकार अब केवल कामकाज तक सीमित नहीं रहना चाहती बल्कि एक सीखने वाली और विकसित होती प्रणाली बनाना चाहती है।

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त्योहारों के बीच नई सोच और सकारात्मक संदेश

प्रधानमंत्री ने यह पत्र ऐसे समय पर लिखा है जब देश के कई हिस्सों में त्योहारों का माहौल है। उन्होंने रोंगाली बिहू, बैसाखी, विशु और पुथंडू जैसे त्योहारों का जिक्र करते हुए कहा कि ये सभी नए अवसर और उम्मीद का प्रतीक हैं। इसी भावना के साथ उन्होंने ‘साधना सप्ताह’ का भी उल्लेख किया, जिसे उन्होंने सीखने और आत्मविकास का उत्सव बताया। प्रधानमंत्री का मानना है कि जब पूरा देश उत्सव के माहौल में है, तब लोक सेवकों को भी नई ऊर्जा और सकारात्मक सोच के साथ अपने काम में जुटना चाहिए। उनका यह संदेश प्रशासनिक सुधार के साथ-साथ भावनात्मक जुड़ाव को भी मजबूत करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।\

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