
हरियाणा के फरीदाबाद में आज को बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की अगुवाई में निकलने वाली ‘सनातन एकता पदयात्रा’ को लेकर बड़े पैमाने पर तैयारियां की गई हैं। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ की संभावना को देखते हुए जिला पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा और यातायात व्यवस्था में व्यापक बदलाव किया है। इस दौरान फरीदाबाद-गुरुग्राम मार्ग पर सभी प्रकार के वाहनों की आवाजाही पूरी तरह बंद रहेगी।
इस धार्मिक यात्रा में हजारों श्रद्धालु शामिल होने की उम्मीद है। अलग-अलग स्थानों पर श्रद्धालुओं के स्वागत, जलपान और विश्राम की व्यवस्था की गई है। जिला प्रशासन ने स्वास्थ्य विभाग, अग्निशमन दल और आपात सेवाओं को भी अलर्ट पर रखा है ताकि किसी भी आपात स्थिति से निपटा जा सके।
MP, UP और राजस्थान में भी ऐसी पदयात्राएं
यात्रा का उद्देश्य देश में सनातन संस्कृति और एकता का संदेश फैलाना है। पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने इससे पहले भी मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और राजस्थान में ऐसी पदयात्राएं निकाली हैं, जिनमें हजारों की संख्या में भक्त शामिल हुए थे। उनका कहना है कि इस यात्रा का मकसद लोगों को धर्म, शांति और भाईचारे के रास्ते पर लाना है।
मांगर चुंगी बॉर्डर से फरीदाबाद में प्रवेश करेगी पदयात्रा
पुलिस प्रवक्ता के अनुसार, 8 नवंबर यह पदयात्रा मांगर चुंगी बॉर्डर से फरीदाबाद में प्रवेश करेगी। इसके बाद यात्रा पाली-मांगर मार्ग होते हुए गुरुग्राम की ओर बढ़ेगी। भीड़ और सुरक्षा कारणों से दोनों ओर का रास्ता यात्रा के दौरान पूरी तरह बंद रहेगा। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे वैकल्पिक मार्गों का प्रयोग करें ताकि किसी तरह की असुविधा न हो।
फरीदाबाद पुलिस ने नागरिकों से सहयोग की अपील करते हुए कहा है कि यात्रा के दौरान किसी भी तरह की अफवाह पर ध्यान न दें और प्रशासन के निर्देशों का पालन करें। यात्रा मार्ग पर अतिरिक्त पुलिस बल, यातायात कर्मी और स्वयंसेवक तैनात रहेंगे। उधर, स्थानीय प्रशासन ने बताया है कि यात्रा के दौरान 8 और 9 नवंबर को कुछ हिस्सों में अस्थायी रूप से यातायात डायवर्ट रहेगा। आसपास के स्कूलों और कार्यालयों को भी स्थिति की जानकारी दी गई है ताकि लोग पहले से अपनी यात्रा योजना बना सकें।
प्रशासन का कहना है कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा और आम नागरिकों की सुविधा दोनों को ध्यान में रखकर यह निर्णय लिया गया है। यात्रियों से अनुरोध किया गया है कि वे संयम और शांति बनाए रखें, ताकि यह धार्मिक कार्यक्रम सौहार्दपूर्ण वातावरण में सम्पन्न हो सके।