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डबवाली को जिला नहीं बनाना सरकार की नाइंसाफी : इनेलो शून्यकाल में नशे का मामला उठाया INLD ने

डबवाली को जिला नहीं बनाना सरकार की नाइंसाफी : इनेलो शून्यकाल में नशे का मामला उठाया INLD ने

Satyakhabarindia

Haryana Assembly : शून्यकाल में अपनी बात रखते हुए सदन में इनेलो के विधायक दल के नेता अदित्य देवीलाल ने डबवाली हलके के गांव मिठड़ी, किंगरे, बनवाला और नौरंग को कालांवाली से डबवाली में स्थानांतरित करने पर धन्यवाद किया। साथ ही चोरमार गांव को भी डबवाली में स्थानांतरित करने की मांग भी रखी। उन्होंने डबवाली को भी जिला बनाने की पूरजोर वकालत की और कहा कि डबवाली को जिला न बना कर सरकार ने डबवाली के लोगों के साथ अन्याय किया है। डबवाली जिला बनने के सभी पैरामीटर पूरा करता है। सरकार यह पारदर्शिता के साथ सार्वजनिक करे कि जिला बनाने के लिए कौन से पैरामीटर लागू किए जाते हैं। डबवाली शहर से लोहगढ़ जूता वाली के लिए कोई सरकारी बस सेवा नहीं है और प्राइवेट बस वाले मनमानी करते हैं और महिलाओं, बच्चों और बुर्जुगों से टिकट का पैसा लेते हैं जबकि सरकार ने इनके लिए फ्री किया हुआ है। चौटाला गांव के बस स्टैंड की बहुत खस्ता हालत है

 

उसको दुरूस्त किया जाए और सभी सरकारी और प्राइवेट बसों को चौटाला गांव के बस स्टैंड से जानी चाहिए। बिजली सुधार के लिए विधायक को कोटे से राशि जारी करने की अनुमति दी जाए। रत्ताखेड़ा से कालुआना और सालमखेड़ा से मटदादू खरीफ चैनल है और इन इलाकों में पानी की बहुत दिक्कत है इसलिए उसकी एक्सटेंशन की जाए। नुइयांवाली ओडां के राजमार्ग पर सुभाष जांघू दिव्यांग है जिसकी जमीन पर मार्केटिंग बोर्ड ने धक्के से कब्जा किया हुआ था अब वो जमीन उसके हक में होने से रास्ता बंद हो गया है। जनहित के लिए दोनों रास्ते खोले जाएं। अबूबशहर किन्नू प्रोसेसिंग प्लांट में सुधार किया जाए और उसमें और मशीनें लगा कर किसानों को राहत दी जाए। मार्केटिंग बोर्ड खरीद केंद्रों की लीज डीड की जाए। आयुष्मान कार्ड को प्राइवेट अस्पतालों में स्वीकार करने की हिदायत दी जाए।

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शून्यकाल में इनेलो के विधायक अर्जुन चौटाला ने प्रदेश में बेतहाशा बढ़ते नशे जैसे बेहद गंभीर विषय पर बोलते हुए कहा कि जब भी हमने नशा को लेकर अपनी बात सरकार के सामने रखी तो सरकार ने हमेशा आश्वासन दिया कि इसका समाधान करेंगे। लेकिन हैरानी की बात है कि बजाय नशे का समाधान करने के सरकार मैराथन कर रही है, पोस्टर लगवा रही है और साइकिल यात्रा निकाल रही है और फिर कहते हैं कि देखो हमने प्रदेश से नशा खत्म कर दिया। गांव गांव पर पुलिस के द्वारा पंचायतों पर दबाव डलवाया गया कि लिख कर दो कि हमारा गांव नशा मुक्त है। सबसे बड़े दुख की बात है कि जिस रामपुरा बिश्रोइया गांव को पुलिस ने पंचायत पर दबाव डाल कर नशा मुक्त घोषित करवाया उसी गांव की एक चार साल की बच्ची को दो नशेडिय़ों ने अगवा कर उसका कत्ल कर दिया। इसके लिए 15 गांव धरने पर बैठे हैं लेकिन उस बच्ची के परिवार को कोई न्याय नहीं मिला है। आज लोग इस तरह की घटना को देख कर एक ही बात कह रहे हैं कि प्रदेश में कानून व्यवस्था नाम की कोई चीज है ही नहीं। नशा कैंसर से भी माड़ी चीज है जो एक बार फैलना शुरू करती है तो ये इंसान को तबाह कर देती है। जो आरोपी हैं उनको तो सजा हो साथ ही वो जिससे नशा लेकर आए और बच्ची को टॉफी में डाल कर दिया उनके खिलाफ भी कड़ी से कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। अगर हम चार साल की बच्ची को न्याय नहीं दिलवा पाए तो यह सरकार के लिए बेहद शर्म की बात होगी।

ध्यानाकर्षण प्रस्ताव

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प्रदेश में विद्यालयों/प्रशिक्षण संस्थानों में प्रशिक्षित शिक्षकों तथा अनुदेशकों की भारी कमी से संबंधित ध्यानाकर्षण प्रस्ताव पर बोलते हुए अर्जुन चौटाला ने कहा कि सरकार द्वारा कौशल रोजगार को बढ़ावा देने के बड़े बड़े दावे किए जा रहे हैं परंतु धरातल पर हालात बेहद खराब हैं और वोकेशनल शिक्षा के लिए पॉलीटेक्निक कॉलेज और आईटीआई में प्रशिक्षित शिक्षकों की भारी कमी है। केवल गेस्ट ट्रेनर के सहारे की कक्षाएं चलाई जा रही हैं। चालू शिक्षा सत्र में 1349 स्कूलों में 2 लाख से अधिक छात्रों ने वोकेशनल शिक्षा के लिए पंजीकरण करवाया है। लेकिन प्रशिक्षित ट्रेनर न होने से उनके साथ खिलवाड़ हो रहा है। अध्यापकों की कमी के चलते शिक्षा की गुणवत्ता का असर पड़ रहा है। सरकार वोकेशनल शिक्षा को लेकर कतई गंभीर नहीं है। अच्छी वोकेशनल शिक्षा के बिना उद्योग जगत को प्रशिक्षित कर्मचारी नहीं मिल पाएंगे। सरकार का यह कदम किसी भी सूरत में प्रदेश के हित में नहीं है जो बड़ी चिंता का विषय है।

 

विधायक आदित्य ने कहा कि यदि शिक्षण संस्थानों में पद खाली हैं तो बच्चों को अच्छी कौशल शिक्षा कैसे मिलेगी। स्थाई टीचर और टेंपरेरी शिक्षक को वेतन में काफी अंतर है। सरकार रोजगार निगम के बजाए सीधी भर्ती करें। आज खेलों में हरियाणा आगे बढ़ता जा रहा है। लेकिन तकनीकी शिक्षा में पिछड़ता जा रहा है। आज हरियाणा के हालात ऐसे हैं कि युवा विदेश में जाना चाहते हैं। क्योंकि हरियाणा में काम नहीं मिल रहा। सरकार को वोकेशनल शिक्षा में विदेशी भाषा कोर्स भी शुरू करने चाहिए ताकि विदेशों में जाकर भी युवा अच्छी नौकरी हासिल कर सकें।

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