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Vinod Kumar Shukla passes away: जन्मपिठ पुरस्कार विजेता हिंदी लेखक विनोद कुमार शुक्ला का 89 वर्ष की आयु में निधन

Satyakhabarindia

Vinod Kumar Shukla passes away: प्रसिद्ध हिंदी लेखक और ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित विनोद कुमार शुक्ला का निधन हो गया है। वे 89 वर्ष के थे। यह खबर हिंदी साहित्य जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति मानी जा रही है। विनोद कुमार शुक्ला ने मंगलवार शाम लगभग 4:58 बजे रायपुर के AIIMS में अंतिम सांस ली। अस्पताल ने इस जानकारी की पुष्टि की है। उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 1 नवंबर को उनका स्वास्थ्य जानने के लिए उनसे फोन पर बात की थी।

स्वास्थ्य संबंधी जानकारी और अस्पताल में भर्ती

छत्तीसगढ़ के सुप्रसिद्ध लेखक विनोद कुमार शुक्ला को सांस लेने में कठिनाई के कारण 2 दिसंबर को AIIMS रायपुर में भर्ती कराया गया था। उनकी स्थिति धीरे-धीरे गंभीर हो गई और उन्होंने मंगलवार को अस्पताल में ही अंतिम सांस ली। उनके निधन की पुष्टि उनके पुत्र शश्वत शुक्ला ने की। शश्वत शुक्ला ने PTI-भाषा को बताया कि उनके पिता लंबे समय से स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहे थे।

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साहित्य जगत में अपूरणीय क्षति

विनोद कुमार शुक्ला हिंदी साहित्य में अपनी अनोखी शैली और गहन सोच के लिए जाने जाते थे। उन्होंने न केवल कहानी और उपन्यासों में उत्कृष्ट योगदान दिया, बल्कि आधुनिक हिंदी साहित्य को नई दिशा देने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। ज्ञानपीठ पुरस्कार के अलावा उन्हें साहित्यिक क्षेत्र में कई अन्य पुरस्कार और सम्मान भी मिल चुके थे। उनके निधन से साहित्य जगत शोक में डूब गया है और लेखकों, साहित्यकारों तथा पाठकों ने उनके प्रति श्रद्धांजलि व्यक्त की है।

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पारिवारिक जानकारी

विनोद कुमार शुक्ला के पीछे उनकी पत्नी, पुत्र शश्वत शुक्ला और एक बेटी हैं। उनके परिवार ने भी इस दुःखद क्षण में अपने प्रियजन के निधन पर शोक व्यक्त किया है। हिंदी साहित्य प्रेमियों के लिए यह समय अत्यंत संवेदनशील है, क्योंकि विनोद कुमार शुक्ला का योगदान न केवल साहित्य को समृद्ध करता था, बल्कि समाज में संवेदनशील सोच और मानवीय मूल्यों को भी उजागर करता था। उनके विचार और साहित्य हमेशा पाठकों के दिलों में जीवित रहेंगे।

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