Parle G की 97 साल पुरानी फैक्ट्री की जगह बनेगा काम्प्लेक्स
देश के लोगों के दिलों में एक खास जगह बनाई Parle G ने, जानिए Parle G के बारे में वह सब कुछ जो जानना जरूरी है

सत्य खबर राष्ट्रीय
Parle G : पारले प्रोडक्ट्स की 97 साल पुरानी विले पार्ले ईस्ट मुंबई स्थित फैक्ट्री की जगह पर एक बड़ा कमर्शियल कॉम्प्लेक्स बनाने का प्लान सिरे चढ़ गया है। यह स्थान भारत के सबसे ज्यादा पहचाने जाने वाले बिस्किट का जन्मस्थान है। Parle Products की स्थापना 1929 में मोहनलाल दयाल चौहान ने मुंबई के विले पार्ले इलाके में की थी। शुरुआत में यहां टॉफी और कैंडी बनाई जाती थीं, लेकिन साल 1939 में कंपनी ने बिस्किट निर्माण की ओर कदम बढ़ाया। यहीं से Parle-G का जन्म हुआ। जिसने धीरे-धीरे देश के हर घर में अपनी जगह बना ली। भारत में शायद ही कोई ऐसा घर होगा, जहां कभी Parle-G बिस्किट न खाया गया हो। चाय के साथ डुबोकर खाया जाने वाला यह बिस्किट सिर्फ एक खाद्य पदार्थ नहीं, बल्कि पीढ़ियों की भावनाओं से जुड़ा हुआ नाम बन चुका है।
कहां से आया Parle
दिलचस्प बात यह है कि “Parle” नाम भी इसी इलाके से जुड़ा है, जिसे Padle और Irle गांवों या फिर विरलेश्वर और पारलेश्वर मंदिरों से जोड़ा जाता है। लेकिन अब Parle-G से जुड़ी खबर ने लोगों को भावुक कर दिया है। मुंबई के विले पार्ले स्थित Parle-G की ऐतिहासिक फैक्ट्री अब बंद हो चुकी है। यह वही फैक्ट्री है, जहां से भारत के सबसे लोकप्रिय बिस्किट ने अपनी पहचान बनाई थी।
सरकार ने दी मंजूरी
मिनिस्ट्री ऑफ एनवायरनमेंट, फॉरेस्ट एंड क्लाइमेट चेंज (MoEFCC) के तहत स्टेट एनवायरनमेंटल इम्पैक्ट असेसमेंट अथॉरिटी (SEIAA) ने 7 जनवरी को इस प्रोजेक्ट को पार्शियल एनवायरनमेंटल क्लियरेंस दे दी है। मंजूरी के मुताबिक, इलाके की 21 पुरानी और जर्जर इमारतों को गिराने की अनुमति दी गई है। 2025 में सबमिट किया गया प्रपोजल आखिरकार मंजूर हो गया है।
क्या है नए प्रोजेक्ट में
इस 5.44 हेक्टेयर प्लॉट पर रीडेवलपमेंट का प्रपोजल है। इसका टोटल कंस्ट्रक्शन एरिया 1,90,360.52 स्क्वायर मीटर (वर्ग मीटर) है। प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत 3,961.39 करोड़ रुपये है। अब इस जगह पर चार बिल्डिंग और तीन और छह मंजिल के दो अलग-अलग पार्किंग टावर बनाए जाएंगे। अक्टूबर 2025 में एयरपोर्ट के पास होने और एयर फनल जोन (Air Funnel Zone) में आने वाले इलाके की वजह से एयरपोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI) ने ऊंचाई की पाबंदियों के साथ नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) जारी किया था। इसके मुताबिक, एक बिल्डिंग की ऊंचाई 30.40 मीटर और दूसरी की 28.81 मीटर तय की गई थी। हालांकि, एनवायरनमेंटल क्लीयरेंस डॉक्यूमेंट्स के मुताबिक, कंपनी ने एक बिल्डिंग के लिए 30.70 मीटर ऊंचाई की मांग की है, जो इस लिमिट से 0.30 मीटर ज्यादा है।

Parle-G की लड़की का सच
Parle-G के पैकेट पर बनी मासूम बच्ची को लेकर दशकों से रहस्य बना हुआ है। कई लोग इसे सुधा मूर्ति, नीरू देशपांडे या किसी असली बच्ची से जोड़ते रहते हैं। Parle Products के वाइस प्रेसिडेंट स्पष्ट करते हैं कि यह असल में कोई वास्तविक लड़की का फोटो नहीं है। यह चित्र 1960 के दशक में कलाकार मगनलाल दहिया द्वारा Everest Creative के लिए डिजाइन किया गया था। इसका उद्देश्य मासूमियत, शुद्धता और पारिवारिक भावनाओं को दर्शाना था। यही वजह है कि यह चेहरा दशकों तक लोगों के दिलों में बस गया।
Parle सिर्फ बिस्किट नहीं, एक विरासत है
Parle-G के अलावा कंपनी ने Hide & Seek, Krackjack, Monaco जैसे लोकप्रिय बिस्किट भी बनाए। साथ ही Kismi, Melody, Eclairs, Mazelo जैसी टॉफियां और स्नैक्स, रस्क, केक व ब्रेकफास्ट सीरियल्स भी बाजार में उतारे। वक्त के साथ बाजार बदला, प्रतिस्पर्धा बढ़ी, लेकिन Parle-G की लोकप्रियता कम नहीं हुई।
यादों में जिंदा रहेगा Parle-G
भले ही विले पार्ले की फैक्ट्री अब इतिहास बन गई हो, लेकिन Parle-G की खुशबू, स्वाद और उससे जुड़ी यादें कभी खत्म नहीं होंगी। यह सिर्फ एक बिस्किट नहीं, बल्कि करोड़ों भारतीयों के बचपन का हिस्सा है। आने वाले समय में बाजार कितना भी बदल जाए, Parle-G हमेशा दिलों में अपनी जगह बनाए रखेगा।
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