लाखों रुपए खर्च करने के बाद मिल रही हाथों में हथकड़ी पैरों में बेड़ी अमेरिका ने अब तक हरियाणा के 654 युवाओं को किया डिपोर्ट
बीती रात भी हरियाणा के 50 युवा अमेरिका से लौटे

अमेरिका में अवैध रूप से रह रहे लोगों को लगातार डिपोर्ट करने का काम किया जा रहा है। बीती रात भी एक जहाज अमेरिका से ऐसे ही लोगों को लेकर दिल्ली पहुंचा है जिसमें हरियाणा के युवाओं की संख्या 50 बताई गई है। सबसे ज्यादा युवा कैथल जिले के 14 बताए गए हैं जबकि जींद जिले के तीन युवा इसमें शामिल थे। एक युवक पानीपत का भी बताया गया है। अमेरिका से अब तक 654 युवा डिपोर्ट हो चुके हैं। एक और फ्लाइट 3 नवंबर को भारत पहुंचने की संभावना है जिसमें हरियाणा के कई युवा शामिल हो सकते हैं।
अमेरिका से आए हरियाणा के युवाओं को अलग-अलग जिलों के अनुसार वहां की पुलिस के हवाले किया गया है और पुलिस ने उनका रिकॉर्ड जांचने के बाद उन्हें उनके परिजनों के हवाले कर दिया है। अभी तक की सूचना के अनुसार कैथल जिले के एक युवा का अपराधी रिकॉर्ड मिला था और उसे कल कोर्ट में पेश किया जाएगा।
डिपोर्ट हुए एक युवक ने बताया कि वह 2 साल पहले अमेरिका गया था। वह अपनी करीब डेढ़ एकड़ जमीन बेचकर डंकी रूट से पनामा के जंगलों से होते हुए कई महीने में अमेरिका पहुंचा। मैक्सिको-अमेरिका की दीवार कूदकर जैसे ही पहुंचे, वहां पर उसे पकड़कर जेल में डाल दिया गया। तब से वह जेल में ही था। अब उसे डिपोर्ट कर दिया गया है। उनको जहाज में बेड़ियों से बांधकर लाया गया और दिल्ली एयरपोर्ट पर उतारा।
डिपोर्ट हुए कैथल के युवाओं में तारागढ़ के नरेश, पीडल के कर्ण, अग्रसेन कॉलोनी के मुकेश, कैथल के ऋतिक, जडौला के सुखबीर सिंह, हाबड़ी के अमित, बुच्ची के अभिषेक, बात्ता के मोहित, पबनावा के अशोक कुमार, सेरधा के आशीष, हाबड़ी के दमनप्रीत, सिसला के प्रभात व ढांड के सतनाम सिंह शामिल हैं। डीएसपी ललित यादव के अनुसार केवल तारागढ़ के नरेश का आपराधिक रिकॉर्ड मिला है उसके खिलाफ चेक बाउंस का एक मामला अदालत में पेंडिंग है। और साथ ही साथ तस्करी का भी एक मामला उसके खिलाफ चल रहा है। वह अदालत में पेश होने की बजाय विदेश चला गया था और अब उसे कल अदालत में पेश किया जाएगा। दोनों ही मामलों में अदालत ने उसे अभी भगोड़ा घोषित नहीं किया था।
जींद जिले के अजय पुत्र राजेश निवासी भैरो खेड़ा, लब्जोत सिंह पुत्र टहलसिंह निवासी निम्नाबाद व नवीन पुत्र जोगेंद्र निवासी पिल्लूखेड़ा कुछ समय पूर्व गैर-कानूनी तरीके से ‘डोंकी रूट’ के माध्यम से अमेरिका चले गए थे। अब यह तीनों युवक अमेरिका से वापस लौट आए हैं। जिन्हें डीएसपी संदीप कुमार की अगुवाई में जींद पुलिस द्वारा सुरक्षित रिसीव किया गया और जांच के बाद परिजनों के हवाले कर दिया गया।
बहुत महंगा पड़ता है डोंकी रूट
डोंकी रूट से जाना बहुत महंगा पड़ता है। एक-एक युवक 30 से 40 लाख रुपए खर्च करके अमेरिका जाता है। वह इन सपनों के साथ अमेरिका जाता है कि अमेरिका जाकर वह मोटा पैसा कमाएगा और अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को सुधारने का काम करेगा। इसके लिए वह न केवल अपनी जमीन भेजता है बल्कि कर्ज लेकर भी वह अमेरिका जाने को तैयार हो जाता है। ट्रंप सरकार के आने से पहले तक सब कुछ ठीक चल रहा था लेकिन ट्रंप सरकार के आने के बाद वहां से जिस प्रकार से युवाओं को डिपोर्ट किया जा रहा है उससे युवाओं का दिल टूटा हुआ नजर आ रहा है।
क्या बोले एसपी जींद
एसपी जींद कुलदीप सिंह ने कहा कि “अगर कोई व्यक्ति विदेश जाना चाहता है तो हमेशा वैध और प्रॉपर चैनल के माध्यम से ही जाए। वीज़ा लगवाने से पहले एजेंट या संस्था का पूरा सत्यापन करें और किसी भी अंजान व्यक्ति के झूठे लालच में न आएं। अवैध रूप से विदेश जाना केवल पैसों की बर्बादी नहीं, बल्कि समाज में नकारात्मक संदेश देने जैसा है।” उन्होंने यह भी कहा कि जिला पुलिस ऐसे मामलों पर लगातार निगरानी रख रही है और जो भी व्यक्ति ‘डोंकी रूट’ जैसे गैरकानूनी रास्तों से युवाओं को बरगलाने की कोशिश करेगा, उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।